Wednesday, December 19, 2012

नारी तुम श्रद्धा हो

                नारी तुम श्रद्धा हो 
नारी तुम श्रद्धा हो ,नारी पूजनीय है ?
कब तक नारी एक भोग्य बनी रहेगी
क्यों उसमें ममता नहीं देखी देती
मंदिर की देवेओं का पूजन व्यर्थ है
जब तक धरा की देविओ को नहीं पूजोगे
आज कितनी  कितनी द्रोप्दिओं का हरण हो रहा है 

कृषण के पथ पे चलो सुदर्शन हाथ में तुझे लेना होगा रावन को भी मत दे दी है इन दरिंदों ने
तुम्हीं राम तुम्हीं लक्ष्मण हो साथिओ
काट डालो इन दरिंदों को 
किसी की बेटी , किसी की बहिन या
नारी का यह हाल न हो ................

3 comments:

  1. बहुत सुंदर ....भावनात्मक रचना

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